पाठ्यक्रम: GS3/ ऊर्जा
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने उच्च एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (22%–30% एथेनॉल) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट प्रदान की है तथा केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अंतर्गत E85 और E100 ईंधनों को मान्यता देने हेतु संशोधनों का प्रस्ताव किया है।
एथेनॉल क्या है?
- एथेनॉल 99.9% शुद्ध अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जा सकता है।
- इसका उत्पादन गन्ना, मक्का, गेहूँ तथा अन्य उच्च स्टार्च-युक्त फसलों से किया जा सकता है।
- अल्कोहल उत्पादन की प्रक्रिया में खमीर की सहायता से शर्करा का किण्वन किया जाता है।
- गन्ने के रस अथवा शीरे में उपस्थित सुक्रोज शर्करा ग्लूकोज़ एवं फ्रुक्टोज में विघटित होकर एथेनॉल उत्पादन में सहायक होती है।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम
- एथेनॉल मिश्रण का आशय पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर ऐसा ईंधन तैयार करना है, जिसका उपयोग आंतरिक दहन इंजनों में किया जा सके।
- वर्ष 2018 में अधिसूचित राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का सांकेतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
- वर्ष 2014 में भारत में पेट्रोल में केवल 1.5% एथेनॉल मिश्रित किया जाता था।
- सरकार द्वारा किए गए विभिन्न हस्तक्षेपों एवं कार्यक्रम की सकारात्मक प्रगति के परिणामस्वरूप 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य वर्ष 2025 में प्राप्त कर लिया गया।
- इस कार्यक्रम के माध्यम से अनुमानतः 1.13 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है तथा संचयी रूप से लगभग 544 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है।
- जून 2026 में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन प्रारंभ किया, जबकि निकट भविष्य में E100 ईंधन भी उपलब्ध कराए जाने की संभावना है।
भारत उच्च एथेनॉल मिश्रण को प्रोत्साहन देने के कारण
- ऊर्जा सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण: भारत अपनी कच्चे तेल (Crude Oil) की आवश्यकता का लगभग 88.5% आयात करता है।
- अधिक एथेनॉल मिश्रण आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम कर ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बना सकता है।
- इससे विदेशी मुद्रा व्यय में कमी आएगी तथा व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रोत्साहन मिलेगा।
- किसानों को समर्थन : एथेनॉल उत्पादन गन्ना, मक्का तथा अधिशेष खाद्यान्नों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराता है।
- इससे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसानों की आय में वृद्धि होती है।
- पर्यावरणीय लाभ: एथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है, जो पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषक उत्सर्जित करता है।
- उच्च एथेनॉल मिश्रण कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने में सहायक है।
- ग्रामीण औद्योगीकरण : आसवनी उद्योगों के विस्तार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अवसंरचना विकास को प्रोत्साहित किया है।
- साथ ही, गैर-कृषि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है।
- वैश्विक जैव ईंधन नेतृत्व: भारत, G20 शिखर सम्मेलन के दौरान स्थापित ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का संस्थापक सदस्य है।
- एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम सतत जैव ईंधन क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को सुदृढ़ करता है।
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम
- राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 (संशोधित 2022): पात्र फीडस्टॉक का विस्तार करते हुए मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, चुकंदर तथा अधिशेष चावल को भी शामिल किया गया।
- इससे एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल गन्ने पर निर्भरता कम हुई है।
- एथेनॉल खरीद मूल्य निर्धारण: सरकार प्रतिवर्ष तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए एथेनॉल खरीद मूल्य अधिसूचित करती है।
- इससे आसवन उद्योगों को निवेश संबंधी निश्चितता तथा किसानों को आय स्थिरता प्राप्त होती है।
- ब्याज अनुदान योजना: आसवनी क्षमता की स्थापना एवं विस्तार हेतु रियायती ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पहल : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन निर्माताओं को ऐसे वाहनों के विकास हेतु प्रोत्साहित किया है, जो उच्च एथेनॉल मिश्रण पर संचालित हो सकें।
- भारत ने E20 से आगे बढ़ने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक रणनीति के अंतर्गत E85 ईंधन प्रारंभ किया है।
- इसका प्रारंभ देशभर के 48 सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के खुदरा बिक्री केंद्रों पर किया गया है।
उच्च एथेनॉल मिश्रण से संबंधित चिंताएँ
- वाहन अनुकूलता संबंधी समस्याएँ: एथेनॉल अत्यधिक हाइग्रोस्कोपिक होता है, अर्थात यह वातावरण से नमी को अवशोषित करता है।
- उच्च एथेनॉल मिश्रण ऐसे वाहनों के इंजन, ईंधन पाइप, रबर सील एवं धातु भागों को क्षति पहुँचा सकता है, जो विशेष रूप से इसके लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं।
- माइलेज में कमी: एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर कम ऊर्जा होती है।
- E10 से E20 मिश्रण में परिवर्तन के बाद उपभोक्ताओं ने माइलेज में कमी की शिकायत दर्ज की है।
- फीडस्टॉक की अस्थिरता: गन्ना उत्पादन मानसून पर अत्यधिक निर्भर है।
- सूखे की स्थिति में एथेनॉल आपूर्ति एवं मिश्रण लक्ष्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- खाद्य बनाम ईंधन परिचर्चा : चावल एवं मक्का जैसी फसलों को एथेनॉल उत्पादन हेतु उपयोग करने से खाद्य सुरक्षा एवं मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- मिश्रण अनुपालन : शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के ईंधन केंद्रों पर समान मिश्रण मानकों को सुनिश्चित करना एक प्रमुख लॉजिस्टिक चुनौती बनी हुई है।
| फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFVs) क्या हैं?फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं, जो पेट्रोल एवं एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों, जैसे E85 एवं E100, पर संचालित हो सकते हैं।इनमें विशेष प्रकार के इंजन एवं ईंधन प्रणालियाँ होती हैं, जो उच्च एथेनॉल सांद्रता को सहन करने में सक्षम होती हैं।वर्तमान में भारत फ्लेक्स-फ्यूल प्रौद्योगिकी को व्यापक स्तर पर अपनाने की संभावनाओं का परीक्षण कर रहा है। |
ब्राज़ील का एथेनॉल कार्यक्रम
- दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता: ब्राज़ील ने 1970 के दशक में वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितताओं के उत्तर में अपना एथेनॉल कार्यक्रम प्रारंभ किया था।
- विगत पाँच दशकों से इसे निरंतर नीतिगत समर्थन प्राप्त होता रहा है।
- चरणबद्ध कार्यान्वयन: ब्राज़ील ने कई दशकों में क्रमिक रूप से एथेनॉल उपयोग का विस्तार किया।
- इस प्रक्रिया में वर्तमान वाहन स्वामियों पर अचानक नीतिगत परिवर्तन का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।
- उपभोक्ता की पसंद: अधिकांश ब्राज़ीलियाई ईंधन स्टेशनों पर उपभोक्ता 27–32% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अथवा E100 (शुद्ध हाइड्रस एथेनॉल) के बीच चयन कर सकते हैं।
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहन: ब्राज़ील ने अनुकूल नीतियों एवं उद्योग सहयोग के माध्यम से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने को प्रोत्साहित किया।
आगे की राह
- भारत को उच्च एथेनॉल मिश्रण की दिशा में क्रमिक एवं साक्ष्य-आधारित संक्रमण अपनाना चाहिए।
- उपभोक्ताओं के हितों एवं वाहन अनुकूलता संबंधी चिंताओं का समुचित समाधान किया जाना चाहिए।
- प्रोत्साहनों एवं तकनीकी सहायता के माध्यम से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को व्यापक स्तर पर अपनाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- कृषि अवशेषों एवं द्वितीय पीढ़ी के जैव ईंधनों जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
स्रोत: IE
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